आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 8वें वेतन आयोग को अपना एक ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन, इंक्रीमेंट और फिटमेंट फैक्टर को लेकर कई बड़ी मांगें की गई हैं। इस प्रस्ताव ने कर्मचारियों में वेतन में 4 गुना बढ़ोतरी की उम्मीद जगा दी है।

आइए जानते हैं BPMS के इस प्रस्ताव की मुख्य बातें और इसके पीछे का गणित क्या है।
1. न्यूनतम सैलरी ₹72,000 करने की मांग
BPMS की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम बेसिक सैलरी (Minimum Basic Pay) को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹72,000 प्रति माह करने की है। 7वें वेतन आयोग में एंट्रीलेवल न्यूनतम सैलरी ₹18,000 तय की गई थी। इस लिहाज से यह सीधे तौर पर 300% या 4 गुना बढ़ोतरी की मांग है। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की अधिकतम बेसिक पे ₹10 लाख तक करने का भी सुझाव है।
2. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) 4.0
न्यूनतम सैलरी को चार गुना करने की मांग के साथसाथ, BPMS ने फिटमेंट फैक्टर को भी 4.0 करने का प्रस्ताव दिया है। संघ का कहना है कि यह नया फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों को महंगाई से राहत दिलाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
3. सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment) 3% से बढ़कर 6% हो
प्रस्ताव में सालाना इंक्रीमेंट को दोगुना करने की बात कही गई है। BPMS का तर्क है कि महंगाई भत्ता (DA) केवल महंगाई से बचाव करता है, जबकि असली इनकम ग्रोथ सालाना इंक्रीमेंट से ही होती है। इसलिए बढ़ते खर्चों को देखते हुए इसे मौजूदा 3% से बढ़ाकर 6% किया जाना चाहिए।
4. परिवार की यूनिट 3 से बढ़कर 5 की जाए
7वें वेतन आयोग ने न्यूनतम सैलरी की गणना 3 फैमिली यूनिट (कर्मचारी, जीवनसाथी और बच्चे) के आधार पर की थी। BPMS ने मांग की है कि इसे बढ़ाकर 5 यूनिट किया जाए। संघ का मानना है कि भारतीय समाज में एक कर्मचारी पर सिर्फ पत्नी और बच्चों की ही नहीं, बल्कि आश्रित मातापिता की भी आर्थिक जिम्मेदारी होती है।
8th Pay Commission Demand : मांग के पीछे का गणित क्या है?
BPMS ने अपनी मांगों को हवा में नहीं, बल्कि आर्थिक आंकड़ों के आधार पर रखा है:
- प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि: संघ ने सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति आय 201617 के ₹1,03,219 से बढ़कर 202425 में ₹1,92,774 हो गई है। यह लगभग 86.76% की बढ़ोतरी है।
- अगर 7वें वेतन आयोग की न्यूनतम सैलरी (₹18,000) और 58% महंगाई भत्ते को जोड़कर (कुल ₹28,440) इस 86.76% की वृद्धि को लागू किया जाए, तो न्यूनतम सैलरी ₹53,114.54 बनती है।
- जब इसे 3 फैमिली यूनिट से 5 फैमिली यूनिट के लिए कैलकुलेट किया गया, तो यह आंकड़ा ₹88,524.24 पर पहुंच गया।
तो फिर ₹72,000 की मांग क्यों?
हालांकि कैलकुलेशन के हिसाब से सैलरी ₹88,524 होनी चाहिए, लेकिन BPMS ने “राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence)” का ध्यान रखते हुए इसे ₹72,000 तक सीमित रखा है। उनका मानना है कि ₹72,000 का आंकड़ा कर्मचारियों की जरूरतों और सरकार के वित्तीय बोझ (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस का खर्च) के बीच एक सही संतुलन बनाएगा।
आगे क्या होगा?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹72,000 की न्यूनतम सैलरी और 4.0 का फिटमेंट फैक्टर फिलहाल सिर्फ BPMS की मांग है, यह कोई अंतिम फैसला नहीं है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग अभी विचारविमर्श और हितधारकों (stakeholders) के साथ बातचीत के दौर में है। आयोग सभी प्रस्तावों का अध्ययन करने के बाद ही सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपेगा।
कुल मिलाकर, BPMS का यह प्रस्ताव केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है, लेकिन सरकार इस पर कितनी मुहर लगाती है, यह वेतन आयोग की फाइनल रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा।